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राजस्व न्यायालयों की क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आयोजन…

ByAajkijankirti

Jul 7, 2026

मुरादाबाद आयुक्त कार्यालय के सभागार में मण्डलायुक्त, मुरादाबाद मण्डल, आञ्जनेय कुमार सिंह की अध्यक्षता में राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से राजस्व न्यायालय क्षमता संवर्धन पर आधारित मण्डलीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारम्भ मण्डलायुक्त द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।कार्यशाला में जनपद बिजनौर और रामपुर के समस्त अपर जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदारों ने प्रतिभाग किया। इसके अतिरिक्त मण्डलीय शासकीय अधिवक्ता, विभिन्न जनपदों के जिला शासकीय अधिवक्ता तथा संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे। मण्डल के सभी जनपदों के राजस्व कर्मियों एवं नामित अधिवक्ताओं ने ऑनलाइन माध्यम (जूम) से कार्यशाला में सहभागिता की। मण्डलायुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह ने कहा कि राजस्व न्यायालयों में पारित प्रत्येक आदेश न्यायसंगत, विधिसम्मत एवं गुण-दोष के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय के साथ राजस्व कानूनों एवं प्रक्रियाओं में निरंतर परिवर्तन होते रहते हैं, इसलिए राजस्व अधिकारियों का नियमित प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि राजस्व वादों के निस्तारण में विधिक प्रक्रिया का पूर्ण पालन करते हुए सभी पक्षकारों को सुनवाई का पर्याप्त अवसर प्रदान किया जाए तथा साक्ष्यों के समुचित परीक्षण के उपरांत ही आदेश पारित किए जाएं।मण्डलायुक्त ने विशेष रूप से निर्देशित किया कि धारा-5, मियाद अधिनियम के आधार पर वादों को केवल तकनीकी कारणों से निरस्त न किया जाए, बल्कि प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर गुण-दोष के आधार पर निर्णय सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि अनावश्यक तकनीकी आधारों पर वादों को खारिज करने से बचा जाए तथा न्यायिक प्रक्रिया की मूल भावना के अनुरूप कार्य किया जाए।उन्होंने सभी अवर न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को निर्देश दिए कि विचाराधीन पत्रावलियों के फर्द-ए-कार्रवाई का प्रतिदिन परीक्षण करें, न्यायालय के अभिलेखों का सावधानीपूर्वक अवलोकन करें, त्रुटिपूर्ण पेजिंग एवं अभिलेखीय कमियों को तत्काल दूर कराएं तथा यथासंभव न्यायिक आदेश स्वयं लिखें। साथ ही न्यायालय की पत्रावलियों के सुव्यवस्थित रख-रखाव, समन तामील प्रक्रिया को प्रभावी बनाने, सभी पक्षकारों को विधिवत नोटिस जारी करने तथा नामांतरण एवं अन्य राजस्व वादों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि राजस्व अधिकारियों को निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं स्पष्ट मंशा के साथ कार्य करते हुए जनता को त्वरित एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराना चाहिए। संवाद, समन्वय एवं विधिक जानकारी के अभाव में निर्णय प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए प्रत्येक अधिकारी को कानून की अद्यतन जानकारी रखना आवश्यक है।कार्यशाला में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी एवं राजस्व विशेषज्ञ जे.पी. गुप्ता तथा यशपाल सिंह, मुख्य पर्यवेक्षक, शत्रु सम्पत्ति ने नॉन-ज़ेड.ए. भूमि, नजूल भूमि, शत्रु सम्पत्ति, निष्क्रांत सम्पत्ति, सीलिंग अधिनियम, वक्फ अधिनियम, प्रशासन अधिनियम-1950, पुनर्वास एवं स्थायी निपटान अधिनियम-1954 तथा शत्रु सम्पत्ति अधिनियम-1968 सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विधिक प्रावधानों पर विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि देश में सर्वाधिक शत्रु सम्पत्तियाँ उत्तर प्रदेश में स्थित हैं, जिनके संरक्षण, अभिलेखीकरण एवं अतिक्रमणमुक्त कराने में राजस्व अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कार्यशाला में अपर आयुक्त (प्रथम) अरुण कुमार सिंह ने निष्क्रांत सम्पत्ति, सीलिंग अधिनियम एवं वक्फ अधिनियम से संबंधित महत्वपूर्ण विधिक प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। वहीं मण्डलीय शासकीय अधिवक्ता श्री दिनेश चौहान ने राजस्व न्यायालयों में वादों के निस्तारण के दौरान आने वाली व्यावहारिक एवं विधिक कमियों पर प्रकाश डालते हुए उनके प्रभावी समाधान के उपाय बताए।कार्यशाला के समापन सत्र में प्रश्नोत्तर कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागी अधिकारियों द्वारा पूछे गए विभिन्न विधिक एवं प्रक्रियात्मक प्रश्नों का विशेषज्ञों ने विस्तार से समाधान किया। अधिकारियों को व्यवहारिक समस्याओं के समाधान, न्यायालयीय प्रक्रिया में एकरूपता तथा गुणवत्तापूर्ण राजस्व न्याय सुनिश्चित करने के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया।कार्यक्रम में अपर आयुक्त (प्रथम) अरुण कुमार सिंह, उप आयुक्त गजेन्द्र प्रताप सिंह, मण्डल के सभी जनपदों के अपर जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार आदि उपस्थित रहे।

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