भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा की उपस्थिति में तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय (टीएमयू), मुरादाबाद के सभागार में जनपद के बीएलओ, सुपरवाइजरों एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत की विशिष्ट निर्वाचन प्रणाली की विशेषताओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी।प्रश्नोत्तरी सत्र में उन्होंने बीएलओ, सुपरवाइजरों एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों से संवाद करते हुए हाल में हुए चुनावों में बढ़ी मतदाता भागीदारी, निष्पक्ष मतदान, पारदर्शी मतगणना तथा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने त्रि-स्तरीय कंकरेंट ऑडिट की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी देते हुए उन देशों का उल्लेख किया, जहाँ मतदान अनिवार्य है, और उनकी तुलना में भारत के विभिन्न राज्यों में लगातार बढ़ रहे मतदान प्रतिशत को भारतीय लोकतंत्र की सशक्त पहचान बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय निर्वाचन प्रणाली की विश्वभर में विश्वसनीयता है और अनेक देशों के प्रतिनिधिमंडल इसकी कार्यप्रणाली का अध्ययन करने भारत आते हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि देश के लगभग 95 करोड़ मतदाताओं में से 60 करोड़ मतदाताओं का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जबकि शेष लगभग 35 करोड़ मतदाताओं का पुनरीक्षण कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि विश्व के 35 सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के निर्वाचन प्रबंधन संस्थानों के समूह इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस (इंटरनेशनल आईडीईए) की अध्यक्षता वर्तमान में भारत निर्वाचन आयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय निर्वाचन प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता उसकी पारदर्शिता और बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से लेकर मतदान एवं मतगणना तक प्रत्येक चरण में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनी रहती है। उन्होंने कहा कि देश में एक मतदान केन्द्र पर औसतन 873 मतदाता हैं। मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करते हैं तथा अनुपस्थित (Absent), स्थानांतरित (Shifted), मृत (Death) एवं डुप्लीकेट (Duplicate) आदि मतदाताओं से संबंधित प्रविष्टियों का परीक्षण करते हैं। इसके आधार पर तैयार ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन से पूर्व संबंधित मतदान केन्द्र के लिए राजनीतिक दलों द्वारा नामित बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) के साथ बैठक कर उनका सत्यापन एवं हस्ताक्षर प्राप्त किए जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को कंकरेंट ऑडिट कहा जाता है। बीएलए के सत्यापन एवं हस्ताक्षर के उपरांत ही ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जाती है। यह व्यवस्था मतदाता सूची निर्माण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाती है। मतदान दिवस में भी प्रत्येक मतदान केन्द्र पर राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त पोलिंग एजेंट उपस्थित रहते हैं। मतदान प्रारंभ होने से पहले मॉक पोल कराया जाता है, जिसमें ईवीएम के सुचारु संचालन का परीक्षण किया जाता है। पोलिंग एजेंट पूरी प्रक्रिया से संतुष्ट होने के बाद मॉक पोल प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर कर अपनी सहमति प्रदान करते हैं, जिसके बाद ही मतदान प्रारंभ होता मतदान के दौरान यदि किसी मतदाता की पहचान पर पोलिंग एजेंट द्वारा संदेह व्यक्त किया जाता है, तो पीठासीन अधिकारी निर्वाचन आयोग के कड़े नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसकी पहचान का परीक्षण कर आवश्यक निर्णय लेते हैं। मतदान समाप्त होने के बाद निर्धारित प्रारूप-17(सी) भाग-1 में मतदान संबंधी विवरण अंकित कर पीठासीन अधिकारी अपने हस्ताक्षर सहित उसकी प्रति पोलिंग एजेंट को उपलब्ध कराते हैं। इसके अतिरिक्त ईवीएम को सील किए जाने की प्रक्रिया में भी पोलिंग एजेंट की उपस्थिति एवं हस्ताक्षर के माध्यम से उनकी संतुष्टि सुनिश्चित की जाती है। मतगणना प्रक्रिया में भी पूर्ण पारदर्शिता अपनाई जाती है। प्रत्येक प्रत्याशी को प्रत्येक मतगणना टेबल पर अपना काउंटिंग एजेंट नियुक्त करने का अधिकार होता है। काउंटिंग एजेंट पूरी मतगणना प्रक्रिया की निगरानी करते हैं तथा विभिन्न चरणों में हस्ताक्षर कर अपनी सहमति दर्ज कराते हैं। मतदाता सूची तैयार करने, मतदान प्रक्रिया एवं मतगणना, इन तीनों चरणों में अपनाई जाने वाली कंकरेंट ऑडिट व्यवस्था भारत निर्वाचन प्रणाली की विशिष्ट पहचान है। इतनी व्यापक, बहुस्तरीय एवं पारदर्शी व्यवस्था विश्व के किसी अन्य देश में देखने को नहीं मिलती। भारत की निर्वाचन प्रणाली पारदर्शिता की जिस उच्च कसौटी पर कार्य करती है, वह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण है।मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा कि यह पहली बार हो रहा है जब भारत निर्वाचन आयोग के शीर्ष नेतृत्व का बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) के साथ सीधा संवाद हो रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान में बीएलओ और सुपरवाइजर्स की मेहनत को सराहा और कहा कि इस प्रक्रिया में बीएलओ का घर-घर जाना, मैपिंग और डेटा संग्रह करने के कार्य के साथ ही निर्धारित अवधि में बड़ी संख्या में मतदाताओं की सुनवाई भी की गई। परिणामस्वरुप पूरी प्रक्रिया बहुत ही सरल तरीके से पूरी हुई। इस अवसर पर मंडलायुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह, डीआईजी मुनिराज, जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी राजेन्द्र पैंसिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल, नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल, एडीएम प्रशासन/उप जिला निर्वाचन अधिकारी संगीता गौतम सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।







