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द्धितीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन….

ByAajkijankirti

May 9, 2026

मुरादाबाद कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरणवर्ष 2026 की द्धितीय राष्ट्रीय लोक अदालत में सर्वाधिक वादों का निस्तारण न्यायालयों द्वारा 23580, प्रशासन द्वारा 195751, बैंक एवं बी0एस0एन0एल0 द्वारा 596 कुल 2 लाख 19 हजार 331 मामलों का निपटारा मुरादाबाद जनपद न्यायालय में इस वर्ष की द्धितीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ, जिसका शुभारम्भ जनपद न्यायाधीश सै॰ माऊज़ बिन आसिम द्वारा मॉ सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय सुनित चन्द्रा, पीठासीन अधिकारी एम0ए0सी0टी0 संजय कुमार, पीठासीन अधिकारी लारा जैगम उददीन, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत घनेन्द्र कुमार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता चौधरी सहित अन्य न्यायिक अधिकारीगण, बैंक पदाधिकारीगण व बार संघ के पदाधिकारीगण उपस्थित रहे। जनपद न्यायाधीश सै॰ माऊज़ बिन आसिम ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का मंच न्याय को आम जनता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है। लोक अदालत में आपसी सुलह-समझौते के आधार पर मामलों का त्वरित निस्तारण किया जा रहा है। इससे आम लोगों को न्याय मिलने में सुविधा हो रही है। शनिवार सुबह से ही जिला न्यायालय परिसर में वादकारियों की लंबी कतारें देखी गईं। विशेष रूप से बैंक ऋण से जुड़े मामलों, यातायात चालान और बिजली बिल बकाया के मामलों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। लोक अदालत में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बिना समझौते के आधार पर मामलों का निस्तारण किया जाता है, जिससे वादकारियों का समय और धन दोनों बचता है। न्यायिक अधिकारियों ने बताया कि लोक अदालत में निस्तारित मामलों के निर्णय अंतिम होते हैं और इनके खिलाफ अपील का कोई प्रावधान नहीं होता।लोक अदालत में जिला कारागार, मुरादाबाद में निरुद्ध बन्दियों द्वारा तैयार की गयीं हस्तशिल्प वस्तुओं की प्रदर्शनी लगायी गयी एवं विक्रय किया गया। लोक अदालत परिसर में एक जनपद एक उत्पाद तथा एक जनपद एक पकवान की प्रदर्शिनी लगाकर विक्रय एवं प्रचार किया गया।प्राधिकरण की सचिव तपस्या त्रिपाठी ने बताया की राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न प्रकृति के 13 हजार 182 शमन योग्य वादों का निस्तारण किया गया। आरोपितों पर 1 लाख 88 हजार 905 रुपये अर्थदंड आरोपित किया गया। वैवाहिक एवं भरण पोषण संबंधी 265 मामलों का निस्तारण परिवार न्यायालय व अपर परिवार न्यायालय द्वारा आपसी सुलह समझौते के आधार पर कराया गया। उत्तराधिकार के कुल 01 मामला निस्तारित कर 45 लाख 74 हजार 182 रुपये के प्रमाण-पत्र जारी किये गये। लघु प्रकृति के मामले जैसे लेबर एक्ट, मोटर वाहन अधिनियम आदि से संबंधित मामलों का भी निस्तारण किया गया। मोटर वाहन दुर्घटना प्रतिकर से संबंधित कुल 38 मामलों का निस्तारण करते हुए पीड़ितों व उनके स्वजन को 3 करोड़ 9 लाख 78 हजार रुपये देने के आदेश दिए गए। विभिन्न बैंकों के ऋण संबंधी कुल 596 मामलों का निस्तारण कर 3 करोड़ 62 लाख 6 हजार 45 रूपये की वसूली की गयी।

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