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जिलाधिकारी ने फाजलपुर और सादकपुर स्थित वृहद गौ संरक्षण केंद्रों का किया निरीक्षण…

ByShaziya Ansari (Editor)

May 30, 2026

मुरादाबाद जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने मुख्य विकास अधिकारी मृणाली अविनाश जोशी एवं जॉइंट मजिस्ट्रेट शक्ति दुबे के साथ विकास खंड मुरादाबाद के ग्राम फाजलपुर तथा विकास खंड छजलैट के ग्राम सादकपुर स्थित वृहद गौ संरक्षण केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।वृहद गौ संरक्षण केंद्र सादकपुर के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि इस वृहद गौ संरक्षण केंद्र को खेती की उर्वरा क्षमता बढ़ाने तथा जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “गौ कृपा अमृतम्” तैयार करने हेतु एक मॉडल गौशाला के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए विकास खंड क्षेत्र की अन्य गौशालाओं में संरक्षित देसी गौवंश को यहां एकत्रित किया जाए। देशी गौवंश के गोबर एवं गोमूत्र से तैयार होने वाला गौ कृपा अमृतम् किसानों के लिए प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने में उपयोगी सिद्ध होगा।निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गौ कृपा अमृतम तैयार करने वाली विशेषज्ञों की टीम के साथ स्थल का भ्रमण किया तथा खंड विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत सचिव एवं लेखपाल को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने गौवंश के लिए हरे चारे की समुचित एवं नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु गौशाला से संबद्ध भूमि क्षेत्र को बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित लेखपाल को राजस्व अभिलेखों में दर्ज चारागाह भूमि को चिन्हित कर उसे अतिक्रमण मुक्त कराने तथा ग्राम पंचायत सचिव को उस भूमि पर हरा चारा तैयार कराकर गौशालाओं को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।वृहद गौ संरक्षण केंद्र फाजलपुर के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने वर्षा एवं बाढ़ के समय संभावित जलभराव की समस्या को गंभीरता से लेते हुए ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के जेई को कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गौशाला के चारों ओर सुदृढ़ और जलभराव को रोकने में सक्षम बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जाए तथा प्रवेश द्वार पर भी रैंप बनाया जाए जिससे अत्यधिक वर्षा अथवा बाढ़ की स्थिति में भी गोवंश को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।जिलाधिकारी ने कहा कि गौ संरक्षण केंद्रों को केवल आश्रय स्थल के रूप में नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक कृषि एवं पर्यावरण संरक्षण के सशक्त केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इसके लिए सभी संबंधित विभाग समन्वय स्थापित करते हुए निर्धारित समय सीमा में आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें।निरीक्षण के दौरान मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील दत्त सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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