मुरादाबाद गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद द्वारा प्रथम पीएच.डी. बैच (सत्र 2025–26) के शोधार्थियों के लिए ‘अन्वेषण’ डॉक्टोरल इंडक्शन प्रोग्राम का भव्य आयोजन पंचायत भवन, मुरादाबाद में किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विषयों—विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, मानविकी, वाणिज्य एवं ललित कला—के शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कुलपति प्रो. सचिन माहेश्वरी ने अपने प्रेरणादायी द्विभाषी संबोधन में शोधार्थियों को ज्ञान के सृजनकर्ता के रूप में अपनी भूमिका को समझने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह प्रथम बैच केवल शोधार्थी नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की शोध परंपरा का आधार है, जिसे उन्हें स्वयं स्थापित करना है। उन्होंने शोध को समाजोन्मुख बनाने पर विशेष बल देते हुए मुरादाबाद एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश की स्थानीय समस्याओं—जैसे पीतल उद्योग, भूजल संकट, कृषि एवं सामाजिक विषयों—पर सार्थक अनुसंधान करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, उन्होंने शोधनैतिकता (Research Ethics) को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए स्पष्ट किया कि शैक्षणिक ईमानदारी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।मुख्य विकास अधिकारी, मुरादाबाद ने अपने संबोधन में शोधार्थियों को शुद्धता एवं ईमानदारी के साथ अनुसंधान कार्य करने की प्रेरणा दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शोध कार्य समाज के लिए उपयोगी एवं प्रासंगिक होना चाहिए। उन्होंने शोध के मार्ग का चयन करने पर सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए इसे राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान का माध्यम बताया।कार्यक्रम का संचालन डॉ. वैशाली पुनिया द्वारा अत्यंत प्रभावी एवं सजीव ढंग से किया गया, जिससे पूरे आयोजन में ऊर्जा एवं उत्साह बना रहा।अंत में कुलसचिव गिरीश कुमार द्विवेदी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय शोधार्थियों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए हर संभव प्रयास करेगा तथा उच्च स्तरीय शैक्षणिक एवं अनुसंधान वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।कार्यक्रम का आयोजन दो सत्रों में हुआ, जिसमें संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र भी शामिल रहा, जहां शोधार्थियों ने सीधे कुलपति से संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, डीन, प्राचार्य एवं संकाय सदस्य भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रायोजन भारतीय स्टेट बैंक द्वारा किया गया।यह आयोजन न केवल शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शन का मंच बना, बल्कि विश्वविद्यालय की भावी शोध संस्कृति की सशक्त नींव भी स्थापित करता है।




